
अगले दिन अर्जुन बस नींद से उठा ही था कि उसके फ़ोन पर अशोक का कॉल चमकने लगा। कॉल उठाते ही अशोक की आवाज़ में एक अजीब-सी गंभीरता थी—
“अर्जुन… तुम्हें आज कोचिंग जाने से पहले प्रेसिडेंट सर से मिलना है। वो तुमसे यहाँ के प्रोटोकॉल को लेकर बात करना चाहते हैं।”
इतना सुनते ही अर्जुन का दिल एक पल को अटक-सा गया। वह जानता था कि उसके टीचर पहले ही साफ़ कर चुके थे—यहाँ वह उसकी कोई मदद नहीं कर पाएँगे। यह सोचकर उसके मन में डर और बेचैनी की एक ठंडी परत उतर गई।
उसके भीतर बस एक ही बात गूंज रही थी—अब क्या होने वाला है?



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